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इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी आज कैंसर इलाज में ला रही हैं नई क्रांति

                                इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी आज कैंसर इलाज में ला रही हैं नई क्रांति

बुलंदशहर: पिछले एक दशक में कैंसर के इलाज में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। अब उपचार केवल सर्जरीकीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी तक सीमित नहीं रह गया हैबल्कि इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों ने इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। ये नई थेरेपी न सिर्फ मरीजों को बेहतर परिणाम दे रही हैंबल्कि उनकी जीवन गुणवत्ता को भी काफी हद तक सुधार रही हैंजिससे उन्हें नई उम्मीद मिल रही है। 


इम्यूनोथेरेपी शरीर की अपनी इम्यून सिस्टम को सक्रिय कर कैंसर से लड़ने में मदद करती है। यह पारंपरिक कीमोथेरेपी से अलग हैक्योंकि कीमोथेरेपी जहां कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकती हैवहीं इम्यूनोथेरेपी इम्यून सिस्टम को इस तरह प्रशिक्षित करती है कि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें अधिक सटीक तरीके से नष्ट कर सके। यह थेरेपी खासतौर पर मेलानोमाफेफड़ोंकिडनी और कुछ प्रकार के लिंफोमा जैसे कैंसर में प्रभावी साबित हुई है। 


मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलवैशाली के मेडिकल ऑन्कोलॉजी (ब्रेस्टथोरैसिकगायनेकोलॉजी) विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. गोपाल शर्मा ने बताया वहीं टार्गेटेड थेरेपी कैंसर कोशिकाओं में मौजूद खास जीन या प्रोटीन और उनके ग्रोथ पाथवे को निशाना बनाती है। इन टार्गेट्स को ब्लॉक करके यह थेरेपी कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकती हैजबकि सामान्य कोशिकाओं पर इसका असर कम पड़ता है। यही कारण है कि यह पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में अधिक सटीक और कम साइड इफेक्ट्स वाली मानी जाती है। ब्रेस्टलंगकोलोरेक्टल और ल्यूकेमिया जैसे कैंसर मेंजहां विशेष म्यूटेशन की पहचान संभव होती हैवहां इसका उपयोग अधिक किया जाता है। ये आधुनिक उपचार कई प्रकार के कैंसर में लाभकारी साबित हो रहे हैंजैसे फेफड़ों का कैंसरब्रेस्ट कैंसरस्किन कैंसर (मेलानोमा)किडनीलिवरकोलोरेक्टलहेड एंड नेकब्लैडरसर्वाइकल और एंडोमेट्रियल कैंसरसाथ ही इसोफेगस और पेट के कैंसर तथा लिंफोमा और कुछ प्रकार के ल्यूकेमिया। लगातार चल रहे क्लिनिकल ट्रायल और रिसर्च इन थेरेपी की उपयोगिता को और भी व्यापक बना रहे हैं।“ 


इन आधुनिक उपचारों के कई फायदे हैं। इनमें एडवांस कैंसर में बेहतर सर्वाइवल रेटपारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में कम साइड इफेक्ट्समरीज के ट्यूमर प्रोफाइल के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट और इलाज के दौरान बेहतर जीवन गुणवत्ता शामिल हैं। कई मरीज इलाज के दौरान भी अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां जारी रख पाते हैं। 


डॉ. गोपाल ने आगे बताया “हालांकिइन थेरेपी को लेकर कुछ गलतफहमियां भी हैं। जैसे यह मानना कि इम्यूनोथेरेपी हर कैंसर में काम करती हैजबकि सच्चाई यह है कि यह कुछ खास प्रकार के कैंसर में ही अधिक प्रभावी होती है और इसकी पहुंच को बढ़ाने के लिए रिसर्च जारी है। इसी तरहटार्गेटेड थेरेपी को कीमोथेरेपी जैसा समझना भी गलत हैक्योंकि यह कैंसर-विशिष्ट जीन या प्रोटीन को निशाना बनाकर काम करती है और आमतौर पर इसके साइड इफेक्ट्स कम होते हैं। हर मरीज के लिए ये उपचार उपयुक्त नहीं होते। डॉक्टर अक्सर यह तय करने के लिए जेनेटिक या बायोमार्कर टेस्ट की सलाह देते हैं कि मरीज का कैंसर इन थेरेपी का कितना अच्छा रिस्पॉन्स देगा। इसलिए ऑन्कोलॉजिस्ट से सही समय पर परामर्श लेना बेहद जरूरी है।“     


लगातार हो रही रिसर्च इन थेरेपी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इन्हें अन्य उपचारों के साथ जोड़ने पर भी काम कर रही है। कई मामलों में इन आधुनिक उपचारों ने कैंसर को जानलेवा बीमारी से एक मैनेजेबल कंडीशन में बदल दिया है। समय पर जांच और कैंसर विशेषज्ञ से जल्दी सलाह लेने से मरीजों को इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसे एडवांस उपचारों का लाभ मिल सकता हैजिससे उनके ठीक होने और लंबे समय तक स्वस्थ रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है।